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अल्फ़ाज़ दिल के



हज़ारों तारें साथ होकर भी रात बेक़रार है

कौन ये जाने उसको किसका इन्तज़ार है


क्यों बुरा मानना रास्ता टेढ़ा है तो

चलना सीख लेना रास्ता कैसा भी हो


कौन साथ देता है इमारतों के जंगल में

सब खो गए है किसी न किसी लालच में


#पस-ए-पर्दा पर्दे के पीछे

हमेशा अकल को पस-ए-पर्दा क्यों धकेलते हो

बाहर लाओगे उसे तो इस्तेमाल भी कर सकते हो


दिल का चोर तू तुम्हें कैसे छुपाया जाए

दिल में शोर मचाते हो क्या किया जाए


करना चाहो तो दिल में ताक़त है

कर दो इस पल में अभी वक्त है


आज यूँ अचानक आँखों में चुभन है कैसी

दर्द सरासर जा बैठी आँखों में धूल जैसी


भेद खोलने का हिम्मत मैं कैसे करूँ

तेरा ज़िक्र करूँ तो भी किस से करूँ


ईद का दिन है रब को याद करो

उसकी दुआओं का स्वाद करो


सच बताऊँ न जानती थी मेरा क़ुसूर क्या था

बाद में पता चला कि सच बताना ही क़ुसूर था


कैसे वक्त चला जाता है कोई बतलाओ तो सही

यूँ सालों साल गुजर जाते है समझने से पहले ही


दिल को दर्द न दो हमेशा परेशान होकर

खुद को मत दो सजा बस यही सोचकर


जो करना है अभी करो बाद में कुछ नहीं होता

वक्त का क्या भरोसा कौन जाने कब क्या होगा


छुप छुप कर दिल चाहता है कुछ अब भी

शायद मोहब्बत हो गई है दिलचस्पी से भी


वरक़ वरक़ ज़िंदगी जोड़ते जाओ सभी

बनेगी प्यारी दास्तान कुल मिलकर कभी


शाम सजी है रंगों में प्यार का नूर भर दो माहौल में

मिल जाए खुशी पलों में और क्या चाहिए जिंदगी में


ये चहकती दुनिया में है रंग हज़ार

चुन लो वो रंग जो तुझे भाये मेरे यार


तेरे मुताबिक़ है सदा धड़कन मेरे धड़कते

वहीं तरन्नुम जो तेरे धड़कन भी हमेशा गाते


किसी से कुछ न कहा मैंने, किसको क्या बतलाना!

सुनकर भी कौन क्या करता, करना तो खुद ही को है


जो ज़माना चाहता है वही करो ना

खुद की मर्ज़ी ज़रा समझा करो ना


वक्त का क्या भरोसा कभी ऊपर कभी नीचे

हमेशा एतबार कर मेरा दिल कहता जोर से


अब मान भी जाओ कब तक रूठते रहोगे

ख़ुशियों के बिना सब दिन यूँ बीत जाएँगे


बदलकर रख दिया मुझ को बोल रही दुनिया

लोग इतना बदल गए कि खुद हैरान है दुनिया


दिन में कम से कम बिताओ ज़रूर ख़ुशी का एक पल

नहीं तो जिंदगी भी क्या ज़िंदगी बस खेलते रहोगे दंगल


मजबूरी या बेबसी बेसवा को रात एक तहख़ाना है

मर्दों की हवस पूरा करने का वह एक कारख़ाना है


ये दुनिया है प्यारे! कोई खिलौना तो नहीं

मासूमियत के लिए यहाँ कोई जगह नहीं


छुपाने से भी न छुपता मेरा राग

ख़ुशी का गीत दे देता मेरा सुराग


सामने आजाए तू मेरे मैं बोली परछाई से

तेरे आगे सदा रोशनी रहे वो बोली धीरे से


हम सब से रूठकर चली गई वो मगर दुआ दी मैंने

मत कोसना कभी माँ ने सिखाई है वही किया मैंने


मुश्किल है ये घड़ी तो परेशान क्यों

लड़ने ही तो आए हो इधर तो लड़ो


ये क्या बात हुई मैं ने सोचा न था

सब अच्छे के लिए यूँ सोचना था


सुनो ग़ौर से रात इक तराना है

जो टिमटिमाहट का गीत गाती है


वालिद मेरे एक अनोखा रतन

चमकते हैं हमेशा तारों के संग

फिर भी साथ है इल्हाम बनकर

उनकी यादें है दिल में हर कदम


भँवरों को दावत इक फूल खिलना

बहार की ख़ूबियत से न कोई तुलना


कुछ कम नहीं है ये भी मुझे ज़िंदगी से बयान करूँ

दिया तू ने सब कुछ फिर भी मैं शिकायत क्यों करूँ


फिर क्या हुआ ये खुदा ही जाने

अजब वक्त को और कौन जाने


#मना नहीं किया

मना नहीं किया गया पर इजाज़त भी नहीं दिया

तबीब ने बोला मिठाई तो सहत का मामला मियाँ


उदासी रात का गहना उसे पहननी है हर शब

मर्दों की हरकतें हँस कर सहनी है पूरी शबाब


ये शाम भी न! दुल्हन की तरह खूबसूरत रहती है

लालिमा से भरी मुस्कानों से मदहोश कर देती है


सन्नाटों से भरी महफ़िल में आवाज़ दे के देखें

फ़ितरत के आँगन में उसकी लहरें कैसे गूँज उठते!


चौंक मत जाना आज की सच्चाई इस जग की सुनकर

और भूल मत जाना कहीं न कहीं हम भी उसके भागीदार


आज की सच्चाई जानने की ताक़त है किसी में?

झूठ में डूब कर आ खड़ी है दुनिया ऐसी नौबत में!


खुदा न करें कोई नुक़सान और पहुँचे

थक गया है जहान मुश्किलें संभलते


दुनिया इस दौर जहन्नुम छूकर आई

अब डर कैसा ऐसी ताक़त जो पाई


देखूँ तो ज़रा फिर से वो प्यार का निशान

जो दिल पर छप गई करते प्यार का बयान


ग़लत और सही ऐसा तो कुछ नहीं

बस नज़रिए तय करते रहते हैं सभी

जुदाई से ज़रा पहले दिल मनाना चाहता था

लेकिन अना हमारे बीच दीवार बन गया था


हम सोचते है कभी कभी तुम से फिर कब मिलना होगा!

जवाब तो मिलता नहीं पर मिलने की ख्वाहिश बढ़ जाएगी


सब रिक्त करके क्या किया जाए ज़िंदगी का दोस्त

रिश्ते नहीं इंसानियत नहीं अकेले पड़ जाओगे सुस्त!


इतनी भी ख़ुदगर्ज़ी ज़िंदगी को न देती ख़ुशी हे दोस्त

तुम जीयो औरों को जीने दो तब ज़िंदगी बनती जन्नत!


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